hindu dharma hi sanatan dharma hai
हिन्दू धर्म ही सनातन धर्म है
वह धर्म क्या है जिसे हम सनातन धर्म कहते हैं ? वह हिन्दू धर्म इसी नाते है कि हिंदू जाति ने इसको रखा है, क्योंकि समुद्र का हिमालय से घिरे हुये इस प्रायद्वीप के एकांतवास में यह फला-फूला है, क्योंकि इस पवित्र और प्राचीन भूमि पर इसकी युगों तक रक्षा करने का भार आर्य जाति को सौंपा गया था । परन्तु यह धर्म किसी एक देश की सीमा से घिरा नहीं है, यह संसार के किसी सीमित भाग के साथ विशेष रूप से और सदा के लिये बंधा नहीं है ।
जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं वह वास्तव में सनातन धर्म है, क्योंकि यही वह विश्वव्यापी धर्म है जो दूसरे सभी धर्मो का आलिंगन करता है । यदि कोई धर्म विश्वव्यापी न हो तो वह सनातन भी नहीं हो सकता । कोई संकुचित धर्म, साम्प्रदायिक धर्म, अनुदान धर्म कुछ काल और किसी मर्यादित हेतु के लिये ही रह सकता है । यही एक ऐसा धर्म है जो अपने अंदर साइंस के आविष्कारों और दर्शनशास्त्र के चिंतनों का पूर्वाभास देकर और उन्हें अपने अंदर मिलाकर जड़वाद पर विजय प्राप्त कर सकता है । यही एक धर्म है जो मानव जाति के दिल में यह बात बिठा देता है कि भगवान हमारे निकट है, यह उन सभी साधनों को अपने अंदर में लेता है जिनके द्वारा मनुष्य भगवान के पास पहुंच सकते हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो प्रत्येक क्षण सभी धर्मोे के मासने हुये इस सत्य पर जोर देता है कि भगवान हर आदमी और हर चीज में है तथा हम उन्हीं में चलते-फिरते हैं और उन्हीं में हम निवास करते हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो इस सत्य को केवल समझने और उस पर विश्वास करने में ही हमारा सहायक नहीं होता बल्कि अपनी सत्ता के अंग-अंग में इसका अनुभव करने में भी हमारी मदद करता है । यही एक धर्म है जो संसार को दिखा देता है कि संसार क्या है-वासुदेव की लीला । यही एक ऐसा धर्म है जो हमें यह बाताता है कि इस लीला में हम अपनी भूमिका अच्छी-से-अच्छी तरह कैसे निभा सकते हैं, जो हमें यह दिखाता है कि इसके सूक्ष्म-से-सूक्ष्म नियम क्या हैं, इसके महान से महान विधान कौन से हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो जीवन की छोटी सो छोटी बात कोेे भी धर्म से अलग नहीं करता, जो यह जानता है कि अमरता क्या है और जिसने मृत्यु की वास्तविकता को हमारे अंदर से एकदम निकाल दिया है ।
जिसे हम हिंदू धर्म कहते हैं वह वास्तव में सनातन धर्म है, क्योंकि यही वह विश्वव्यापी धर्म है जो दूसरे सभी धर्मो का आलिंगन करता है । यदि कोई धर्म विश्वव्यापी न हो तो वह सनातन भी नहीं हो सकता । कोई संकुचित धर्म, साम्प्रदायिक धर्म, अनुदान धर्म कुछ काल और किसी मर्यादित हेतु के लिये ही रह सकता है । यही एक ऐसा धर्म है जो अपने अंदर साइंस के आविष्कारों और दर्शनशास्त्र के चिंतनों का पूर्वाभास देकर और उन्हें अपने अंदर मिलाकर जड़वाद पर विजय प्राप्त कर सकता है । यही एक धर्म है जो मानव जाति के दिल में यह बात बिठा देता है कि भगवान हमारे निकट है, यह उन सभी साधनों को अपने अंदर में लेता है जिनके द्वारा मनुष्य भगवान के पास पहुंच सकते हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो प्रत्येक क्षण सभी धर्मोे के मासने हुये इस सत्य पर जोर देता है कि भगवान हर आदमी और हर चीज में है तथा हम उन्हीं में चलते-फिरते हैं और उन्हीं में हम निवास करते हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो इस सत्य को केवल समझने और उस पर विश्वास करने में ही हमारा सहायक नहीं होता बल्कि अपनी सत्ता के अंग-अंग में इसका अनुभव करने में भी हमारी मदद करता है । यही एक धर्म है जो संसार को दिखा देता है कि संसार क्या है-वासुदेव की लीला । यही एक ऐसा धर्म है जो हमें यह बाताता है कि इस लीला में हम अपनी भूमिका अच्छी-से-अच्छी तरह कैसे निभा सकते हैं, जो हमें यह दिखाता है कि इसके सूक्ष्म-से-सूक्ष्म नियम क्या हैं, इसके महान से महान विधान कौन से हैं । यही एक ऐसा धर्म है जो जीवन की छोटी सो छोटी बात कोेे भी धर्म से अलग नहीं करता, जो यह जानता है कि अमरता क्या है और जिसने मृत्यु की वास्तविकता को हमारे अंदर से एकदम निकाल दिया है ।
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